दो पंक्तियाँ

जनवरी 28, 2011 at 10:38 अपराह्न (Couplet)

— Ghanshyam

चाँद छूने के बाद तुम्हें छूना है सूरज भी,
मेरे ख़्वाबों का मीनार मगर आसमां से भी ऊंचा है |

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परमालिंक 1 टिप्पणी

दो पंक्तियाँ

दिसम्बर 7, 2008 at 8:31 अपराह्न (Couplet)

– Ghanshyam

पढने को पढ़ा है सबक सादगी का
जीने को कुछ और ही सीखा है |

परमालिंक 2 टिप्पणियाँ

दो पंक्तियाँ

नवम्बर 30, 2008 at 12:18 पूर्वाह्न (Couplet, Uncategorized)

– Ghanshyam

इतने सपने संजो के रखें हैं दिल ने मेरे,
डूबी रहती हैं नींद में सदा आँखें मेरी.

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